★भगवान श्रीकृष्ण विश्वरूप दर्शन★

 
★भगवान श्रीकृष्ण विश्वरूप दर्शन★
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दीनानाथ दयानिधि स्वामी,कौन भांति मैं तुम्हें रिझाऊं।श्रीगंगा चरणों से निकली,शुचि नीर कहाँ से प्रभु लाऊँ।कामधेनु कल्पवृक्ष तुम्हारे,कौन पदारथ भोग लगाऊँ।चार वेद तुम मुख से भाखे,और कहा प्रभु पाठ सुनाऊँ।अनहद बाजे बजत तुम्हारे,ताल मृदंग क्या शंख बजाऊं।कोटि भानु थारे नख की शोभा,दीपक ले प्रभु कहा दिखाऊं।लक्ष्मी थारे चरण की चेरी,कौन द्रव्य प्रभु भेट चढ़ाऊँ।तुम त्रिलोक के कर्ता धर्ता,तुम्हें छोड़ प्रभु कौन पै जाऊँ।सूरश्याम प्रभु विपद विदारण,मनवांछित प्रभु तुमही से पाऊँ।
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shwetashweta
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